एक रासायनिक अभिक्रिया को संपन्न करने के लिए उन क्रियाकारी स्पीशीज (परमाणु, अणु या आयन) की संख्या जिनका एक साथ टकराना आवश्यक है, अभिक्रिया की आणविकता कहलाती है|
अभिक्रिया की आणविकता पूर्णांक होती है तथा इसका मान 1, 2, 3 इत्यादि हो सकता है|
👉 एक आणविक अभिक्रियाएं (Unimolecular reactions)-
जब किसी अभिक्रिया में क्रियाकारी पदार्थ का केवल एक अणु भाग लेता है तो उस अभिक्रिया की आणविकता एक होती है|
जैसे-
NH4NO2 ---> N2 + 2H2O
👉 द्वि-आणविक अभिक्रियाएं (Bimolecular reactions)-
जब अभिकारकों के दो अणु आपस में टकरा कर रासायनिक परिवर्तन उत्पन्न करते हैं तो अभिक्रिया की आणविकता दो होती है|
जैसे-
2HI ---> H2 + I2
2N2O5 ---> 2N2O4 + O2
👉 त्रि-आणविक अभिक्रियाएं (Trimolecular reactions)-
जब अभिकारकों के तीन अणु आपस में टकरा कर रासायनिक परिवर्तन उत्पन्न करते हैं तो अभिक्रिया की आणविकता तीन होती है|
जैसे-
2NO + Cl2 ---> 2NOCl
2NO + O2 ---> 2NO2
तीन से अधिक आणविकता वाली अभिक्रियाएं दुर्लभ हैं क्योंकि तीन से अधिक अणुओं के एक साथ टकराने की संभावना अत्यंत कम होती है|
छद्म एकआणविक अभिक्रियाएं (Pseudo-Unimolecular reactions)-
वे प्रथम कोटि अभिक्रियायें, जिनकी आणविकता एक से अधिक होती है, छद्म एकआणविक अभिक्रियाएं कहलाती हैं|
जैसे -
CH3COOC2H5 + H2O ----> CH3COOH + C2H5OH
C12H22O11 + H2O ----> C6H12O6 + C6H12O6
उपरोक्त दोनों अभिक्रियाओं में अभिक्रिया का वेग जल पर निर्भर नहीं करता है| इसलिए यह प्रथम कोटि की अभिक्रिया है, परंतु इसकी आणविकता 2 है|
मौलिक अभिक्रियाओं की आणविकता-
वे साधारण अभिक्रियाएं जो केवल एक पद में पूर्ण होती हैं, मौलिक अभिक्रियाएं कही जाती हैं| इन अभिक्रियाओं में भाग लेने वाले अणुओं की संख्या उसकी आणविकता को व्यक्त करती है|
मौलिक अभिक्रियाओं की आणविकता अभिक्रिया के संतुलित समीकरण द्वारा व्यक्त किए गए अभिकारक परमाणु, आयन या अणुओं की संख्या के बराबर मानी जाती है|
जैसे-
NH4NO2 ---> N2 + 2H2O (आणविकता =1)
2HI ---> H2 + I2 (आणविकता =2)
2NO + Cl2 ---> 2NOCl (आणविकता =3)
जटिल अभिक्रियाओं की आणविकता-
वे अभिक्रियाएं जो दो या अधिक पदों में पूर्ण होती हैं उन्हें जटिल अभिक्रियाएं कहा जाता है| जटिल अभिक्रियाओं की आणविकता संतुलित अभिक्रिया की स्टॉयशियोमिटरी द्वारा ज्ञात नहीं की जा सकती है क्योंकि इस प्रकार की अभिक्रियाओं को संतुलित समीकरणों में काफी अधिक संख्या में अभिकारक अणु हो सकते हैं|
जैसे-
2FeCl3 + 6KI ---> 2FeI2 + 6KCl + I2
2KMnO4 + 16HCl ----> 2KCl + 2MnCl2 + 5Cl2 + 8H2O
इन अभिक्रियाओं को देखने से यह लगता है कि इनकी आणविकता बहुत अधिक है, परंतु ऐसा नहीं होता है| जटिल अभिक्रियाओं की आणविकता ज्ञात करने में यह माना जाता है कि यह अभिक्रियाएं कई पदों में पूर्ण होती हैं| प्रत्येक पद में एक, दो या अधिक से अधिक तीन अणु भाग लेते हैं|
किसी जटिल अभिक्रिया के सबसे मंद पद (वेग निर्धारित करने वाला पद) में भाग लेने वाले अभिकारक अणुओं या परमाणुओं की संख्या को जटिल अभिक्रिया की आणविकता कहा जाता है जैसे-
2NO + 2H2 ---> N2 + 2H2O
यह माना जाता है कि यह अभिक्रिया निम्न 2 पदों में पूर्ण होती है-
पद 1-
2NO + H2 ---> N2 + H2O2 (मंद)
पद 2-
H2O2 + H2 ---> 2H2O (तीव्र)
क्योंकि पद 1 मंद है अतः यह वेग निर्धारित करने वाला पद है| पद 1 में अभिकारकों के अणुओं की संख्या 3 है| अतः सबसे मंद मौलिक पद की आणविकता 3 है| इसे संपूर्ण अभिक्रिया की आणविकता माना जा सकता है|
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